चरण 1: रूपरेखा:
1. प्रस्तावना
2. बेरोजगारी का अर्थ
3. बेरोजगारी के कारण
4. बेरोजगारी के दुष्परिणाम
5. समस्या का समाधान
6. सरकारी प्रयास
7. उपसंहार
चरण 2: निबन्ध:
प्रस्तावना
भारत आज संसार का सबसे युवा देश है, परन्तु यहाँ के करोड़ों युवा काम की तलाश में भटक रहे हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद भी उन्हें योग्यता के अनुसार रोजगार नहीं मिलता। बेरोजगारी की यह समस्या देश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बन गई है।
बेरोजगारी का अर्थ
जब कोई व्यक्ति काम करने के योग्य और इच्छुक होता है, फिर भी उसे काम नहीं मिलता, तो उसे बेरोजगार कहते हैं। कुछ लोगों के पास काम तो होता है, पर वह उनकी योग्यता से बहुत कम स्तर का होता है। इसे अर्द्ध-बेरोजगारी कहा जाता है।
बेरोजगारी के कारण
इसका सबसे बड़ा कारण तेजी से बढ़ती जनसंख्या है। नौकरियाँ कम हैं और आवेदन करने वाले बहुत अधिक। हमारी शिक्षा-प्रणाली भी किताबी ज्ञान पर अधिक जोर देती है और व्यावहारिक कौशल कम सिखाती है। लोग खेती छोड़कर शहरों की ओर भाग रहे हैं। बड़ी मशीनों के आने से कुटीर और लघु उद्योग कमजोर हुए हैं। सरकारी नौकरी के मोह के कारण भी युवा निजी काम या स्वरोजगार से बचते हैं।
बेरोजगारी के दुष्परिणाम
बेरोजगार युवक निराशा और तनाव में घिर जाता है। गरीबी बढ़ती है और परिवार का पालन-पोषण कठिन हो जाता है। कई बार युवक चोरी, नशे और अपराध की राह पकड़ लेते हैं। देश की प्रतिभा विदेश चली जाती है और समाज में असन्तोष फैलता है।
समस्या का समाधान
जनसंख्या पर नियन्त्रण करना सबसे पहला कदम है। शिक्षा को रोजगारपरक बनाया जाए और तकनीकी तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण पर बल दिया जाए। कुटीर उद्योगों, हस्तशिल्प और लघु उद्योगों को प्रोत्साहन मिले। गाँवों में ही रोजगार के साधन बढ़ाए जाएँ, ताकि शहरों की ओर पलायन रुके। युवाओं को अपना काम शुरू करने की सोच अपनानी चाहिए।
सरकारी प्रयास
सरकार ने मनरेगा, कौशल भारत, स्टार्टअप इण्डिया, मुद्रा योजना और मेक इन इण्डिया जैसी योजनाएँ चलाई हैं। इनसे लाखों लोगों को काम और प्रशिक्षण मिला है, फिर भी अभी बहुत कुछ करना शेष है।
उपसंहार
बेरोजगारी दूर होने पर ही देश की युवा-शक्ति राष्ट्र-निर्माण में लग सकेगी। सरकार, समाज और युवा तीनों को मिलकर प्रयास करना होगा। तभी भारत समृद्ध और आत्मनिर्भर बनेगा।
निष्कर्ष:
कौशल, स्वरोजगार और सही नीतियों के सहारे बेरोजगारी की समस्या को कम किया जा सकता है।