चरण 1: निबन्ध की रूपरेखा:
1. प्रस्तावना
2. आतंकवाद का अर्थ और स्वरूप
3. आतंकवाद के प्रमुख कारण
4. भारत और विश्व पर दुष्प्रभाव
5. समाधान के उपाय
6. उपसंहार
चरण 2: निबन्ध: आतंकवाद की समस्या और समाधान:
प्रस्तावना
आज का युग विज्ञान और प्रगति का युग है, पर इसी युग में मानवता के सामने सबसे भयानक संकटों में से एक आतंकवाद खड़ा है। निर्दोष लोगों की हत्या, बम-विस्फोट, अपहरण और भय का वातावरण किसी भी सभ्य समाज को शोभा नहीं देता। भारत ने कश्मीर, पंजाब, मुम्बई और संसद पर हुए हमलों के रूप में इस पीड़ा को कई बार झेला है।
आतंकवाद का अर्थ और स्वरूप
आतंकवाद का अर्थ है हिंसा और भय के बल पर अपनी बात मनवाने का प्रयास। आतंकी अपने लक्ष्य के लिए आम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों तक को निशाना बनाते हैं। इसका उद्देश्य सरकार और समाज में डर फैलाना, अस्थिरता पैदा करना और देश की एकता को तोड़ना होता है। यह अब किसी एक देश की समस्या नहीं रही, बल्कि सीमा-पार और अन्तर्राष्ट्रीय रूप ले चुकी है।
आतंकवाद के प्रमुख कारण
आतंकवाद के पीछे अनेक कारण होते हैं। गरीबी, बेरोजगारी और अशिक्षा के कारण युवा आसानी से बहकावे में आ जाते हैं। धार्मिक कट्टरता और गलत व्याख्या भी उन्हें हिंसा की ओर धकेलती है। कुछ देश अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए आतंकी संगठनों को धन, हथियार और प्रशिक्षण देते हैं। सोशल मीडिया के दुरुपयोग से भी झूठा प्रचार फैलाया जाता है। सीमाओं पर कमजोर निगरानी और आपसी अविश्वास भी इसे बढ़ावा देता है।
दुष्प्रभाव
आतंकी घटनाओं से अनगिनत परिवार उजड़ जाते हैं। अर्थव्यवस्था को भारी हानि होती है, पर्यटन और उद्योग ठप हो जाते हैं। समाज में सम्प्रदायों के बीच शक और घृणा बढ़ती है। सुरक्षा पर होने वाला भारी व्यय विकास-कार्यों से हटकर लगाना पड़ता है। बच्चों के मन पर भय की गहरी छाप पड़ जाती है।
समाधान के उपाय
आतंकवाद को जड़ से मिटाने के लिए कठोर और बहुआयामी कदम आवश्यक हैं। सुरक्षा बलों को आधुनिक हथियार और गुप्तचर तंत्र की मजबूती मिलनी चाहिए। आतंकियों को शीघ्र और कड़ा दण्ड देने की न्याय-व्यवस्था हो। सभी देशों को मिलकर आतंकवाद के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर एकजुट होना होगा और आतंक को पनाह देने वालों पर आर्थिक प्रतिबन्ध लगाने होंगे। साथ ही युवाओं को शिक्षा, रोजगार और सही मार्गदर्शन देकर उन्हें इस राह से बचाना होगा। नागरिकों को भी जागरूक रहना चाहिए और संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस को देनी चाहिए।
उपसंहार
आतंकवाद मानवता का शत्रु है और इसका कोई धर्म नहीं होता। शान्ति, भाईचारा और सद्भाव की शिक्षा ही इसका स्थायी इलाज है। यदि सरकार, समाज और विश्व-समुदाय मिलकर प्रयास करें तो वह दिन दूर नहीं जब पूरी दुनिया भय से मुक्त होकर शान्ति से साँस ले सकेगी।
निष्कर्ष:
यह निबन्ध रूपरेखा के क्रम में लिखा गया है और प्रस्तावना से उपसंहार तक पूर्ण है।