Step 1: भूमिका:
जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है, जिसके बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी असम्भव है। मानव, पशु-पक्षी, वनस्पति — सभी के अस्तित्व का आधार जल ही है। मानव शरीर का लगभग सत्तर प्रतिशत भाग जल से बना है, तथा कृषि, उद्योग और दैनिक जीवन के हर क्षेत्र में इसकी अनिवार्य भूमिका है। किन्तु आज बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण तथा जल-प्रदूषण के कारण स्वच्छ जल का संकट गहराता जा रहा है। भूजल स्तर निरन्तर घट रहा है और अनेक क्षेत्रों में पेयजल की भारी कमी है। हमें वर्षा-जल संचयन, जल के विवेकपूर्ण उपयोग तथा नदियों-तालाबों के संरक्षण जैसे उपायों को अपनाना होगा। विद्यालय एवं समाज स्तर पर जल-संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना अत्यन्त आवश्यक है। यदि हम अभी नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ियाँ जल के अभाव में गम्भीर संकट का सामना करेंगी। अतः स्पष्ट है — जल है तो कल है।
Final Answer:
उपर्युक्त निबन्ध विषय 'जल ही जीवन है' पर एक सुसंगठित प्रस्तुति है, जिसमें भूमिका, विषय-वस्तु और निष्कर्ष का समावेश है।