चरण 1: रूपरेखा:
1. प्रस्तावना
2. वृक्षों का महत्व
3. वनों की कटाई और उसके परिणाम
4. वृक्षारोपण के उपाय और कार्यक्रम
5. हमारा कर्तव्य
6. उपसंहार
चरण 2: निबन्ध:
प्रस्तावना
वृक्ष धरती का श्रृंगार और मनुष्य के सच्चे मित्र हैं। ये हमें बिना कुछ माँगे फल, फूल, छाया, लकड़ी और शुद्ध वायु देते हैं। हमारे पुराणों में कहा गया है कि एक वृक्ष दस पुत्रों के समान होता है। आज जब जंगल तेजी से कट रहे हैं, तब वृक्षारोपण का महत्व और भी बढ़ गया है।
वृक्षों का महत्व
वृक्ष दिन में कार्बन डाइऑक्साइड लेकर हमें ऑक्सीजन देते हैं। इसी से हम साँस ले पाते हैं। इनकी जड़ें मिट्टी को बाँधकर भू-स्खलन और कटाव रोकती हैं। वृक्षों से बादल आकर्षित होते हैं और वर्षा होती है। इनसे हमें भोजन, औषधियाँ, ईंधन और इमारती लकड़ी मिलती है। कागज, रबर और गोंद जैसी वस्तुएँ भी पेड़ों से बनती हैं। पक्षियों और अनेक जीवों का घर भी वृक्ष ही हैं।
वनों की कटाई और उसके परिणाम
बढ़ती आबादी, खेती के विस्तार, सड़कों और कारखानों के लिए वनों को बेरहमी से काटा जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि वर्षा कम हो रही है, धरती का तापमान बढ़ रहा है और नदियाँ सूख रही हैं। वर्षा में मिट्टी बहने से बाढ़ आती है और भूमि बंजर होती है। वन्य-जीवों के घर उजड़ने से वे बस्तियों में घुस आते हैं।
वृक्षारोपण के उपाय और कार्यक्रम
जितने पेड़ काटे जाएँ, उससे अधिक लगाए जाने चाहिए। सड़कों, नहरों, रेल-लाइनों के किनारे और खाली भूमि पर पौधे लगाए जाएँ। हमारे देश में हर वर्ष जुलाई के पहले सप्ताह में वन-महोत्सव मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत सन् 1950 में हुई थी। सरकार सामाजिक वानिकी जैसे कार्यक्रम चलाती है। विद्यालयों में भी पौधे लगाने की प्रतियोगिताएँ होनी चाहिए।
हमारा कर्तव्य
हमें केवल पौधा लगाकर छोड़ नहीं देना चाहिए, उसकी सिंचाई और सुरक्षा भी करनी चाहिए। जन्मदिन, विवाह और त्योहार जैसे अवसरों पर पौधा लगाने की परम्परा बनानी चाहिए। लोगों को वृक्षों के महत्व के बारे में समझाना भी हमारा दायित्व है।
उपसंहार
वृक्षारोपण केवल सरकारी काम नहीं, यह जन-आन्दोलन बनना चाहिए। आज लगाया गया एक पौधा कल हमारी सन्तानों के लिए छाया, फल और जीवन देगा।
निष्कर्ष:
पेड़ लगाना जीवन बचाना है। हरी-भरी धरती ही सुखी जीवन का आधार है।