प्रस्तावना:
मैथिलीशरण गुप्त (1886-1964) हिन्दी साहित्य के 'राष्ट्रकवि' के रूप में प्रतिष्ठित हैं, जिन्होंने अपनी कविता के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना एवं भारतीय संस्कृति का उद्घोष किया।
जीवन-परिचय:
उनका जन्म झाँसी जिले के चिरगाँव में हुआ था। वे द्विवेदी-युग के प्रमुख कवि रहे और उनकी रचनाओं में राष्ट्रीयता, नारी-गरिमा तथा पौराणिक-ऐतिहासिक प्रसंगों का सुंदर समन्वय मिलता है।
प्रमुख कृतियाँ:
'भारत-भारती', 'साकेत' (जिसमें उर्मिला के चरित्र को केंद्रीय स्थान दिया गया), 'यशोधरा', 'पंचवटी' आदि उनकी अमर कृतियाँ हैं। 'साकेत' के लिए उन्हें मंगलाप्रसाद पारितोषिक प्राप्त हुआ।
योगदान:
उन्होंने स्वतंत्रता-आंदोलन के दौरान अपनी कविताओं के माध्यम से जन-मानस में देशभक्ति की भावना जगाई। महात्मा गांधी ने भी उनकी काव्य-प्रतिभा की भूरि-भूरि प्रशंसा की थी।
उपसंहार:
मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य आज भी राष्ट्रीय एकता एवं सांस्कृतिक गौरव की प्रेरणा देता है — यही उनकी चिरस्थायी विरासत है।