चरण 1: रूपरेखा:
1. प्रस्तावना
2. नई शिक्षा नीति का परिचय
3. प्रमुख विशेषताएँ और गुण
4. दोष और आलोचनाएँ
5. सफल क्रियान्वयन के सुझाव
6. उपसंहार
चरण 2: निबन्ध:
प्रस्तावना
शिक्षा किसी राष्ट्र के भविष्य की नींव होती है। समय के साथ ज्ञान, तकनीक और रोजगार की आवश्यकताएँ बदलती हैं, इसलिए शिक्षा-प्रणाली में भी बदलाव जरूरी हो जाता है। लगभग तीन दशक पुरानी नीति को बदलने के लिए भारत सरकार ने नई शिक्षा नीति लागू की।
नई शिक्षा नीति का परिचय
नई शिक्षा नीति को जुलाई 2020 में केन्द्रीय मंत्रिमण्डल ने स्वीकृति दी। यह इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर आधारित है। इसने वर्ष 1986 की शिक्षा नीति का स्थान लिया।
प्रमुख गुण
इस नीति ने विद्यालयी शिक्षा का ढाँचा 10+2 की जगह 5+3+3+4 कर दिया, जिसमें प्रारम्भिक बाल्यावस्था की देखभाल और शिक्षा को भी जोड़ा गया है। कम से कम पाँचवीं कक्षा तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाने पर बल दिया गया है, जिससे बच्चे विषय को आसानी से समझते हैं। छठी कक्षा से व्यावसायिक शिक्षा और इंटर्नशिप की व्यवस्था है। कला, विज्ञान और वाणिज्य के बीच की कठोर दीवार हटाकर विषय चुनने की स्वतंत्रता दी गई है। उच्च शिक्षा में बहु-प्रवेश और बहु-निकास की सुविधा, चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम और अकादमिक क्रेडिट बैंक जैसी बातें विद्यार्थियों के लिए लाभदायक हैं। शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का छह प्रतिशत खर्च करने का लक्ष्य भी रखा गया है।
दोष और आलोचनाएँ
नीति के कुछ पक्षों पर प्रश्न भी उठे हैं। पर्याप्त धन, भवन और प्रशिक्षित शिक्षकों के बिना इसे लागू करना कठिन है। शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए कई राज्यों को केन्द्र के बढ़ते हस्तक्षेप की आशंका है। त्रिभाषा सूत्र को लेकर भाषा-विवाद की सम्भावना बनी रहती है। ऑनलाइन शिक्षा पर बल देने से गाँवों और गरीब परिवारों के बच्चे पिछड़ सकते हैं, क्योंकि उनके पास साधन कम हैं।
सफल क्रियान्वयन के सुझाव
सरकार को शिक्षकों की भर्ती और प्रशिक्षण पर ध्यान देना चाहिए। विद्यालयों में पुस्तकालय, प्रयोगशाला और इंटरनेट जैसी सुविधाएँ बढ़ानी होंगी। राज्यों से परामर्श करके ही नीति को चरणबद्ध रूप से लागू करना उचित रहेगा।
उपसंहार
नई शिक्षा नीति में रटने की जगह समझ, कौशल और रचनात्मकता पर बल दिया गया है, जो सराहनीय है। यदि इसे ईमानदारी और पर्याप्त संसाधनों के साथ लागू किया जाए तो यह भारत को ज्ञान-आधारित समाज बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
निष्कर्ष:
निबन्ध में नीति के गुणों और दोषों का सन्तुलित विवेचन ही उत्तर का मुख्य आधार है।