Step 1: Understanding the Question:
यह प्रश्न विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) और लेन्ज के नियम (Lenz's Law) पर आधारित है।
त्रिज्या बढ़ने से परिनालिका के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल बढ़ेगा, जिससे चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होगा।
Step 2: Key Formula or Approach:
चुंबकीय फ्लक्स: \(\Phi = B \cdot A\)
लेन्ज के नियम के अनुसार, प्रेरित धारा चुंबकीय फ्लक्स में वृद्धि का विरोध करेगी।
चुंबकीय ऊर्जा घनत्व: \(u = \frac{B^2}{2\mu_0}\)
Step 3: Detailed Explanation:
• चुंबकीय क्षेत्र \(B_{in}\) में परिवर्तन:
जब परिनालिका की त्रिज्या बढ़ती है, तो उसका क्षेत्रफल \(A = \pi R^2\) बढ़ता है।
इससे परिनालिका से गुजरने वाला कुल बाह्य चुंबकीय फ्लक्स \(\Phi = B_0 A\) बढ़ता है।
लेन्ज के नियम के अनुसार, परिपथ में प्रेरित धारा उत्पन्न होगी जो इस बढ़ते फ्लक्स का विरोध करेगी।
इसलिए, प्रेरित चुंबकीय क्षेत्र बाह्य क्षेत्र \(\mathbf{B}\) की विपरीत दिशा में होगा।
अतः, परिनालिका के अंदर का कुल चुंबकीय क्षेत्र \(B_{in} = B_0 - B_{induced}\) कम हो जाएगा।
• चुंबकीय ऊर्जा \(U_{in}\) में परिवर्तन:
अतिचालक (Superconducting) या अत्यंत कम प्रतिरोध वाले लूप के लिए चुंबकीय फ्लक्स \(\Phi = B_{in} A\) लगभग नियत रहता है।
चूँकि \(A\) बढ़ता है, \(B_{in}\) घटता है ताकि \(\Phi\) नियत रहे:
\[ B_{in} \propto \frac{1}{R^2} \]
कुल चुंबकीय ऊर्जा:
\[ U_{in} = \left( \frac{B_{in}^2}{2\mu_0} \right) \times \text{आयतन} \propto B_{in}^2 R^2 \propto \left(\frac{1}{R^4}\right) R^2 \propto \frac{1}{R^2} \]
चूँकि त्रिज्या \(R\) बढ़ रही है, इसलिए चुंबकीय ऊर्जा \(U_{in}\) भी घटेगी।
अतः, \(B_{in}\) और \(U_{in}\) दोनों घटेंगे।