'पंचलाइट' कहानी का प्रमुख पात्र गोबर एक साधारण ग्रामीण युवक है, जिसकी सरलता, संकोच और प्रेम भरी भावनाएँ उसे विशेष बनाती हैं। वह शिक्षा से वंचित होते हुए भी बुद्धिमान और स्वाभिमानी है। गाँव की परंपराओं और मान्यताओं से बंधा होने के बावजूद वह अपने प्रेम को व्यक्त करने का साहस नहीं जुटा पाता। गोबर की सादगी और दृढ़ निश्चय उसे एक प्रामाणिक चरित्र बनाते हैं, जो सामाजिक परिस्थितियों से जूझते हुए भी अपने स्वाभिमान को बनाए रखता है। उसकी मासूमियत और प्रयास उसे गाँव के अन्य युवकों से अलग करते हैं।
इसके अलावा, गोबर का चरित्र प्रेम और संकोच के द्वंद्व का प्रतीक है। वह अपने अंदर दबी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाता, लेकिन उसकी भावनाओं की सच्चाई स्पष्ट रूप से झलकती है। पंचलाइट जलाने की उसकी क्षमता गाँव में उसकी प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित कर देती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सच्ची योग्यता और आत्मनिर्भरता ही व्यक्ति को सम्मान दिलाती है। गोबर की कहानी हमें आत्मविश्वास और अपने कौशल पर विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देती है।