पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए: दुःख की पिछली रजनी बीच विकसता सुख का नवल प्रभातः एक परदा यह झीना नील छिपाये है जिसमें सुख गात । जिसे तुम समझे हो अभिशाप जगत की ज्वालाओं का; ईश का वह रहस्य वरदान कभी मत इसको जाओ भूल ।
Question: 1
प्रस्तुत पद्यांश के पाठ एवं कवि का नाम लिखिए।
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कविता के मूल विषय और भाषा शैली को पहचानकर उसके कवि और स्रोत का अनुमान लगाया जा सकता है।
पद्यांश में कहा गया है कि जो परिस्थितियाँ हमें अभिशाप प्रतीत होती हैं, वे वास्तव में ईश्वर का वरदान होती हैं। कठिनाइयों और संघर्षों के माध्यम से ही जीवन में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार होता है। हमें कष्टों को नकारात्मक दृष्टि से नहीं देखना चाहिए, बल्कि उन्हें ईश्वर की योजना के रूप में स्वीकार करना चाहिए।
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Question: 3
'विकसता' तथा 'अभिशाप' शब्दों के अर्थ लिखिए।
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शब्दों के अर्थ को संदर्भ के साथ जोड़कर समझने से कविता के भाव अधिक स्पष्ट होते हैं।
श्रद्धा हताश और निराश व्यक्ति के मन को प्रेरणा दे रही है। जो लोग जीवन के संघर्षों और कठिनाइयों से हार मान लेते हैं, श्रद्धा उन्हें यह विश्वास दिलाती है कि दुख के बाद सुख अवश्य आता है।
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Question: 5
'जगत् की ज्वालाओं का भूल' से कवि का क्या आशय है?
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जीवन के संघर्षों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने से मनुष्य आत्मविकास कर सकता है।
कवि का आशय यह है कि संसार में जो दुःख, पीड़ा और कठिनाइयाँ हैं, वे मात्र बाहरी रूप से हमें परेशान कर सकती हैं, परंतु उनके भीतर भी एक गहरा संदेश छिपा होता है। यदि हम उन कष्टों को वरदान समझकर स्वीकार करें, तो वे हमें आत्मिक रूप से मजबूत बनाते हैं।