निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
मेरा जीवन एक खुली किताब रहा है। मेरे न कोई रहस्य हैं और न मैं रहस्यों को प्रश्रय देता हूँ । मैं पूरी तरह भला बनने के लिए संघर्षरत एक अदना सा इनसान हूँ। मैं मन, वाणी और कर्म से पूरी तरह सच्चा और पूरी तरह अहिंसक बनने के लिए संघर्षरत हूँ । यह लक्ष्य सच्चा है, यह मैं जानता हूँ पर उसे पाने में बार-बार असफल हो जाता हूँ। मैं मानता हूँ कि इस लक्ष्य तक पहुँचना कष्टकर है पर यह कष्ट मुझे निश्चित आनंद देने वाला लगता है। इस तक पहुँचने की प्रत्येक सीढ़ी मुझे अगली सीढ़ी तक पहुँचने के लिए शक्ति तथा सामर्थ्य देती है।
जब मैं एक और अपनी लपता और अपनी सीमाओं के बारे में सोचना हूँ और दूसरी और मुझमे लोगों की जो अपेक्षाएँ हो गई हैं, उनकी बात सोचना है तो एक क्षण के लिए तो मैं स्तब्ध रह जाता है। फिर यह समझकर प्रकृतिस्थ हो जाता हूँ कि ये अपेक्षाएँ मुझसे नहीं हैं। ये सत्य और अहिंसा के दो अमूल्य गुर्णी के मुझमें अवतरण है। यह अवतरण कितना ही अपूर्ण हो पर मुझमें अपेक्षाकृत अधिक द्रष्टव्य है।