निम्नलिखित पद्यों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
मुझे फूल मत मारो,
मैं अबला बाल विधनी, कुसंतोदयविहीन।
होकर मधु के मीठा मदन, पत्त तुम कुतर, गरल न गाओ।
मुझे विकलता, तुम्हे विकलता, हर्षो, श्रम परिहारो।
नहीं भोजिनी यह कोई, जो तुम जान भरो।
बल हो तो सिंदुर-बिंदी यह - यह हर नेज निभाओ।
स्पर्श कंदु, तुम्हे तो मेरे पति पर वारो।
लो, यह मेरी चरण-धूलि उस रीति के सिर पर धारे।
प्रेम और ईर्ष्या की वस्तनाओं में पड़कर मनुष्य की स्थिति कैसी हो जाती है?
‘आचारण की सभ्यता’ निबंध के लेखक हैं:
‘हिन्दी नयी चाल में ढली’ यह कथन किस लेखक का है?
‘उसने कहा था’ कहानी के लेखक हैं:
‘पिंजरे की मैना’ निबंध संग्रह के लेखक हैं:
‘कलम का सिपाही’ के रचनाकार हैं:
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य का प्रथम मौलिक उपन्यास निम्न में से किसको माना है?
नाटक नहीं है
स्वामी दयानंद सरस्वती की रचना है
'हमेरे आंगन चहकने द्वार' के रचनाकार हैं
प्रो० जी० सुंदर रेड्डी द्वारा लिखित निबंध है