Step 1: Understanding the Question:
यह प्रश्न लैक ओपेरान (lac operon) की संरचनात्मक व्यवस्था और उसके ऋणात्मक नियमन (negative regulation) की क्षमता से संबंधित है।
हमें यह पहचानना है कि दी गई संरचनाओं में से कौन सी संरचनाएं ऋणात्मक रूप से नियमित होने में सक्षम हैं।
Step 2: Key Formula or Approach:
1. ऋणात्मक नियमन के लिए एक नियामक जीन (\(i\) जीन) का होना आवश्यक है जो दमनकारी (repressor) प्रोटीन बना सके।
2. संरचनात्मक जीन (\(z, y, a\)) एक प्रमोटर (\(P\)) और ऑपरेटर (\(O\)) के नियंत्रण में होने चाहिए ताकि दमनकारी ऑपरेटर से जुड़कर अनुलेखन को रोक सके।
3. दमनकारी प्रोटीन एक 'trans-acting' कारक है, जिसका अर्थ है कि नियामक जीन (\(i\)) का ओपेरान के ठीक बगल में होना अनिवार्य नहीं है, वह कहीं से भी विसरित होकर ऑपरेटर से जुड़ सकता है।
Step 3: Detailed Explanation:
• संरचना i: \([P] [i] [P] [O] [z] [y] [a]\) - यह सामान्य जंगली प्रकार का लैक ओपेरान है। यहाँ \(i\) जीन का अपना प्रमोटर है और संरचनात्मक जीन \(z-y-a\) सुव्यवस्थित हैं। यह पूरी तरह से ऋणात्मक रूप से नियमित हो सकता है।
• संरचना iii: \([P] [i] [P] [O] [y] [z] [a]\) - यहाँ यद्यपि संरचनात्मक जीनों का क्रम बदल गया है (\(y\) पहले है), लेकिन नियमन के सभी आवश्यक घटक (\(i\) जीन और \(P-O\) नियंत्रण) अभी भी उपस्थित हैं। चूंकि दमनकारी प्रोटीन एक trans-acting प्रोटीन है, यह अभी भी ऑपरेटर से जुड़कर इस ओपेरान को ऋणात्मक रूप से नियमित कर सकता है।
• संरचनाएं ii और iv में नियंत्रण तत्वों की व्यवस्था त्रुटिपूर्ण है जो सामान्य नियमन की अनुमति नहीं देती।
अतः, संरचनाएं i और iii दोनों ही ऋणात्मक रूप से नियमित हो सकती हैं।
Step 4: Final Answer:
अतः, सही विकल्प (A) है क्योंकि दोनों ही मामलों में दमनकारी प्रोटीन ऑपरेटर से जुड़कर अनुलेखन को ऋणात्मक रूप से नियंत्रित कर सकता है।