Question:

निम्नलिखित पिठत पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृितयाँ कीिजए : विजय केवल लोहे की नहीं, धर्म की रही धरा पर धूम 
भिक्षु होकर रहते सम्राट, दया दिखलाते घर-घर घूम। 
'यवन' को दिया दया का दान, चीन को मिली धर्म की दृष्टि 
मिला था स्वर्ण भूमि को रत्न, शील की सिंहल को भी सृष्टि। 
किसी का हमने छीना नहीं, प्रकृति का रहा पालना यहीं 
हमारी जन्मभूमि थी यहीं, कहीं से हम आए थे नहीं।...... 
चरित थे पूत, भुजा में शक्ति, नम्रता रही सदा संपन्न 
हृदय के गौरव में था गर्व, किसी को देख न सके विपन्न। 

(2)(i) पद्यांश से लय-ताल युक्त शब्द ढूँढ़कर लिखिए : 
 

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तुकांत शब्द आमतौर पर कविता की पंक्तियों के अंत में पाए जाते हैं। समान ध्वनि वाले शब्दों पर ध्यान दें।
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Solution and Explanation

Step 1: Understanding the Concept:
लय-ताल युक्त शब्द (तुकांत शब्द) वे शब्द होते हैं जिनकी अंतिम ध्वनि समान होती है, जैसे 'रही' और 'यहीं'। हमें पद्यांश से ऐसे शब्द खोजने हैं।

Step 2: Detailed Explanation:
पद्यांश में निम्नलिखित तुकांत शब्द हैं: \[\begin{array}{rl} \bullet & \text{धूम - घूम (पंक्ति 1 और 2)} \\ \bullet & \text{दृष्टि - सृष्टि (पंक्ति 3 और 4)} \\ \bullet & \text{यहीं - नहीं (पंक्ति 5 और 6)} \\ \bullet & \text{संपन्न - विपन्न (पंक्ति 7 और 8)} \\ \end{array}\] इनमें से कोई भी दो जोड़े लिखे जा सकते हैं।

Step 3: Final Answer:
(1) धूम - घूम
(2) दृष्टि - सृष्टि

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