चरण 1: प्रश्न को समझना:
प्रश्न में उस परिघटना के बारे में पूछा गया है जो विषमपर्णी विकास (heterophylly), यानी एक ही पौधे पर विभिन्न प्रकार की पत्तियों का विकास, की व्याख्या करती है, जो पर्यावरण के प्रभाव के कारण होता है।
चरण 2: दिए गए शब्दों का विश्लेषण:
• सुघट्यता (प्लास्टिसिटी - Plasticity): यह पौधों की वह क्षमता है जिसके द्वारा वे अपने जीवन के विभिन्न चरणों या विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों के जवाब में अलग-अलग संरचनात्मक रूप विकसित करते हैं। विषमपर्णी विकास (heterophylly) प्लास्टिसिटी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उदाहरण के लिए, कपास, धनिया और लार्कस्पर में किशोर और परिपक्व पौधों की पत्तियों का आकार अलग-अलग होता है। इसी तरह, बटरकप (Ranunculus) जैसे जलीय पौधों में, जो पत्तियाँ पानी के नीचे होती हैं, वे पानी के ऊपर की पत्तियों से बहुत अलग आकार की होती हैं। यह सीधे तौर पर पर्यावरण के प्रभाव को दर्शाता है।
• निर्विभेदन (Dedifferentiation): यह वह प्रक्रिया है जिसमें एक विभेदित, परिपक्व कोशिका अपनी विभाजन क्षमता को पुनः प्राप्त कर लेती है। यह प्लास्टिसिटी से अलग है।
• पुनर्विभेदन (Redifferentiation): यह वह प्रक्रिया है जिसमें निर्विभेदित कोशिकाएं फिर से परिपक्व होकर एक विशिष्ट कार्य करने लगती हैं।
• लचीलापन (Flexibility): यह एक सामान्य शब्द है और जीव विज्ञान में प्लास्टिसिटी के लिए सटीक तकनीकी शब्द नहीं है।
चरण 3: अंतिम उत्तर:
पर्यावरण के जवाब में पौधों द्वारा विभिन्न विकास पथों का अनुसरण करने की क्षमता को सुघट्यता या प्लास्टिसिटी कहा जाता है। विषमपर्णी विकास इसका एक उदाहरण है। अतः, सही उत्तर विकल्प (D) है।