चरण 1: प्रश्न को समझना:
प्रश्न में लघुबीजाणुजनन (microsporogenesis) की प्रक्रिया में शामिल विभिन्न संरचनाओं को उनके विकास के सही क्रम में व्यवस्थित करने के लिए कहा गया है।
चरण 2: लघुबीजाणुजनन के चरणों का विश्लेषण:
लघुबीजाणुजनन परागकोश के भीतर परागकणों के निर्माण की प्रक्रिया है। इसके चरण इस प्रकार हैं:
• प्रक्रिया एक युवा परागकोश में समरूप द्विगुणित कोशिकाओं के एक समूह से शुरू होती है जिसे बीजाणुजन ऊतक (Sporogenous tissue) (B) कहा जाता है।
• बीजाणुजन ऊतक की प्रत्येक कोशिका विभेदित होकर पराग मातृ कोशिका (Pollen Mother Cell - PMC) या लघुबीजाणु मातृ कोशिका (microspore mother cell) (D) बनाती है। यह भी द्विगुणित (2n) होती है।
• प्रत्येक पराग मातृ कोशिका अर्धसूत्री विभाजन (meiosis) से गुजरती है, जिसके परिणामस्वरूप चार अगुणित (haploid, n) लघुबीजाणुओं का एक समूह बनता है, जिसे लघुबीजाणु चतुष्क (Microspore tetrad) (A) कहा जाता है।
• जैसे ही परागकोश परिपक्व होता है, चतुष्क के लघुबीजाणु एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं और परागकण (Pollen grain) (C) में विकसित हो जाते हैं।
चरण 3: सही क्रम का निर्धारण:
उपरोक्त चरणों के आधार पर, विकास का सही क्रम है:
बीजाणुजन ऊतक (B) \(\rightarrow\) पराग मातृ कोशिका (D) \(\rightarrow\) लघुबीजाणु चतुष्क (A) \(\rightarrow\) परागकण (C)
अर्थात, B \(\rightarrow\) D \(\rightarrow\) A \(\rightarrow\) C.
चरण 4: अंतिम उत्तर:
यह क्रम विकल्प (C) से मेल खाता है। अतः, विकल्प (C) सही उत्तर है।