निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
सुनो सुमिता! तुम्हारा पत्र पाकर खुशी हुई। तुमने अधिकार की बात उठाई है, वह पसंद आई। बेशक, जहाँ जिस बात से तुम्हारा असहमति हो; वहाँ तुम्हें अपनी बात मुझसे समझाने का पूरा अधिकार है। मुझे खुशी होगी तुम्हारे इस अधिकार पाने पर। इससे मेरी खुशी और बढ़ेगी भी। जहाँ कोई कुछ सिखा सके, वहाँ भी परस्पर आदान-प्रदान से राह निकलती ही जाएगी। अपनी-अपनी बात कहने-सुनने में संबंध का संकुचन कैसा? मैंने तो अधिकार की बात पर यही सीखा था कि मैं उस बेटी की माँ हूँ, जो जीवन में ऊँचा उठने के लिए बड़े ऊँचे सपने देखा करती है; आकाश में अपने छोटे-छोटे ड़ैने को फैला कर!
धरती से बहुत ऊँचाई में फैले हुए ड़ैनों को यथार्थ से दूर संकुचित भी मैं काटना नहीं चाहती। केवल उनकी ड़ोर मज़बूत करना चाहती हूँ कि अपनी किसी ऊँचाई की उड़ान में वो लड़खड़ा न जाएँ। इसलिए कहना चाहती हूँ कि 'उड़ो बेटी, उड़ो, पर धरती पर निगाह रखना'; कहीं ऐसा न हो कि धरती से जुड़ी ड़ोर कट जाए और किसी अनजाने-अवांछित स्थल पर गिरकर ड़ैने क्षत-विक्षत हो जाएँ। ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि तुम एक समझदार लड़की हो। फिर भी सावधानी तो अपेक्षित है।
यह सावधानी का ही संकेत है कि निगाह हमेशा उड़ान पर केंद्रित उड़ान भरे। उस धरती पर जो तुम्हारा आधार है—उसमें परिवार का, तुम्हारे संस्कार का, तुम्हारी सांस्कृतिक परंपरा का, तुम्हारी सामर्थ्य का भी आधार जुड़ा होना चाहिए। हमें पुरानी-ग़लत रूढ़ियों को तोड़ना है, अच्छी परंपराओं को नहीं।
आकृति पूर्ण कीजिए:
उड़ान भरते समय हमारा यह आधार होना चाहिए —
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परिवार का आधार
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संस्कारों का आधार
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सांस्कृतिक परंपरा का आधार
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सामर्थ्य का आधार
Step 1: गद्यांश का सार.
गद्यांश में एक माँ अपनी बेटी सुमिता को समझाती है कि उसे जीवन में ऊँचा उठने का अधिकार है, पर साथ ही अपने मूल्यों और परंपराओं से जुड़ा रहना चाहिए। यह सन्देश आत्मनिर्भरता और संस्कार के संतुलन को दर्शाता है।
Step 2: आकृति का विश्लेषण.
लेखिका कहती हैं कि उड़ान भरते समय व्यक्ति का आधार मजबूत होना चाहिए। यह आधार चार चीज़ों से जुड़ा होता है — परिवार, संस्कार, सांस्कृतिक परंपरा और सामर्थ्य। यही चारों जीवन में स्थिरता और संतुलन बनाए रखते हैं।
Step 3: निष्कर्ष.
इस प्रकार उड़ान भरते समय व्यक्ति को अपने मूल्यों, संस्कारों, परिवार और संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि इन्हीं से उसका जीवन स्थिर और सफल बनता है।
निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए हुए समानार्थी शब्द ढूँढ़कर लिखिए:
\[\begin{array}{|c|c|} \hline \textbf{शब्द} & \textbf{समानार्थी शब्द (गद्यांश से)} \\ \hline \text{(1) आनंद} & \text{खुशी} \\ \hline \text{(2) नभ} & \text{आकाश} \\ \hline \text{(3) पुत्री} & \text{बेटी} \\ \hline \text{(4) सजगता} & \text{सावधानी} \\ \hline \end{array}\]
Step 1: गद्यांश का पुनर्पाठ.
गद्यांश में प्रयुक्त शब्दों का अर्थ ध्यानपूर्वक समझने पर स्पष्ट होता है कि इन शब्दों के समानार्थी शब्द प्रसंगानुसार प्रयुक्त हैं।
Step 2: समानार्थी शब्दों की पहचान.
'आनंद' शब्द के स्थान पर 'खुशी', 'नभ' के स्थान पर 'आकाश', 'पुत्री' के लिए 'बेटी' और 'सजगता' के स्थान पर 'सावधानी' शब्द प्रयुक्त हुआ है।
Step 3: निष्कर्ष.
गद्यांश में समानार्थी शब्दों का प्रयोग भाषा को प्रभावशाली और जीवंत बनाता है। ये शब्द पाठ की भावनाओं को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करते हैं।
वर्तमान पीढ़ी के युवक-युवतियों का जीवन के प्रति बदला दृष्टिकोण' इस विषय पर अपने विचार 40 से 50 शब्दों में स्पष्ट लिखिए।
Step 1: विषय की व्याख्या.
वर्तमान समय में युवाओं की सोच में बड़ा परिवर्तन आया है। वे अपने जीवन को नई दृष्टि से देखना चाहते हैं।
Step 2: विचार विस्तार.
आज के युवक-युवतियाँ जीवन में स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को अधिक महत्त्व देते हैं। वे सामाजिक परंपराओं को तोड़कर भी प्रगति की राह पर चलना चाहते हैं। उनका ध्यान शिक्षा, करियर और आत्मसंतोष की ओर है।
Step 3: निष्कर्ष.
इस प्रकार नई पीढ़ी का दृष्टिकोण आधुनिक सोच और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर आधारित है, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।