'मनुष्यता' कविता में कवि लोगों से किस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा करता है? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।
कवि 'मनुष्यता' कविता में लोगों से ऐसे व्यवहार की अपेक्षा करता है जो समाज में प्रेम, सहनशीलता और मेलजोल को बढ़ावा दें। वह चाहता है कि हम अपने अंदर दया, सहानुभूति और समझदारी को जागृत करें ताकि हम एक-दूसरे के दर्द और दुख को महसूस कर सकें।
1. कवि सभी से दयालुता और सहानुभूति रखने की अपेक्षा करता है ताकि हर व्यक्ति को सम्मान और प्यार मिले। दयालुता से मनुष्य के रिश्ते मजबूत होते हैं और समाज में शांति बनी रहती है।
2. इसके साथ ही वह सहनशीलता और सहयोग की भी मांग करता है। हमें दूसरों की परेशानियों को समझकर उनकी मदद करनी चाहिए और समाज में एकजुटता बनाए रखनी चाहिए। यह गुण मनुष्यता की पहचान हैं जो हमें इंसान बनाते हैं।
इस प्रकार, कविता हमें यह सिखाती है कि केवल ज्ञान और शक्ति से नहीं, बल्कि सच्ची मनुष्यता के व्यवहार से ही समाज और व्यक्ति की उन्नति संभव है।
संगतकार' कविता के संदर्भ में लिखिए कि संगतकार जैसे व्यक्तियों के व्यक्तित्व से युवाओं को क्या प्रेरणा मिलती है। किन्हीं दो का वर्णन कीजिए।
'मैं क्यों लिखता हूँ?' पाठ के आधार पर प्रत्यक्ष अनुभव और अनुभूति को स्पष्ट करते हुए लेखक पर पड़ने वाले इनके प्रभाव को लिखिए। आप दोनों में से किसे महत्त्व देते हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
'साना-साना हाथ जोड़ि...' पाठ में प्रकृति की विराटता का दर्शन है।' - पाठ के दृश्यों के आधार पर इसे स्पष्ट करते हुए लिखिए।
'माता का अँचल' पाठ से बच्चों के किन्हीं दो खेलों और उनके परिवेश का अंतःसंबंध स्पष्ट करते हुए टिप्पणी लिखिए।
फागुन की मनोहारिता मनुष्य के मन पर क्या प्रभाव डालती है? 'अट नहीं रही है' कविता के आधार पर लिखिए।
