Question:

'माता का अंचल' पाठ में बाबूजी माताजी से कब और क्यों नाराज हो जाते थे ? संतान के प्रति इस प्रकार का व्यवहार क्या आपको अपने घर या घर के आसपास भी दिखाई देता है ? संक्षेप में वर्णन कीजिए।

Updated On: Jan 13, 2026
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Solution and Explanation

'माता का अंचल' पाठ में बाबूजी माताजी से तब नाराज़ हो जाते थे जब माताजी भोलानाथ के खेल में हस्तक्षेप करती थीं या उसे अनावश्यक रूप से बाधित करती थीं।
विशेषकर, जब भोलानाथ अपने साथियों के साथ खेलने में लीन होता था और माताजी उसे जबरदस्ती पकड़कर कपड़े पहनाती थीं या उसे नहाने-धोने के लिए खींचती थीं, तो बाबूजी को यह व्यवहार अनुचित लगता था।
बाबूजी बच्चे की स्वाभाविक प्रवृत्ति को समझते थे और चाहते थे कि वह खुलकर खेले, जबकि माताजी को उसकी साफ-सफाई और अनुशासन की अधिक चिंता रहती थी।
हाँ, संतान के प्रति इस प्रकार का व्यवहार आज भी अनेक घरों में देखने को मिलता है।
कई बार माता-पिता के बीच बच्चे की परवरिश, उसकी आदतों, पढ़ाई या खेलने-कूदने की आदतों को लेकर भिन्न राय होती है।
एक अभिभावक बच्चे को अधिक स्वतंत्रता देना चाहता है, जबकि दूसरा उसे अधिक अनुशासित और नियंत्रित रखना चाहता है।
यह स्थिति अक्सर परिवार में छोटी-मोटी नोंक-झोंक का कारण बनती है, हालाँकि इसका उद्देश्य बच्चे का भला ही होता है।
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