'मनुष्य का सबसे प्रथम गुण साहस है। साहसी की प्रतिभा के सामने शोक, भय भाग जाते है। साहसी को संसार भी रास्ता दे देता है। मनुष्य में सब गुण हो वह विद्वान हो, धनवान हो, शक्तिशाली हो, पर यदि उसमें साहस न हो तो वह अपने सद्गुणों का अपनी योग्यताओं व अपनी शक्तियों का उपयोग नहीं कर सकता। साहस मनुष्य के व्यक्तित्व नायक है। साहस व्यक्ति को निर्भय बनाता है और जहाँ निर्भयता होती है, वहाँ सफलता निश्चित है। निर्भयता से ही आत्मविश्वास जाग्रत होता है।'
'चरम वैयक्तिकता ही परम सामाजिक है' - किस शीर्षक पाठ की पंक्ति है ?
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जयशंकर प्रसाद का निधन कब हुआ था ?
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'सूरदास का जन्म स्थान कहाँ है ?
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