सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय' का जन्म 7 मार्च 1911 को उत्तर प्रदेश के जनपद प्रयागराज में हुआ था। वे हिंदी के प्रसिद्ध कवि, लेखक और पत्रकार थे। 'अज्ञेय' जी का लेखन बौद्धिकता, अनुभूति और अनुभव पर आधारित था। उन्होंने आधुनिक कविता में नई लहर का सूत्रपात किया। उनके लेखन में समाजिक और मानसिक पहलुओं की गहरी छानबीन की गई है। उनकी प्रमुख रचनाएँ 'शेष प्रश्न', 'नया गीत', 'कविता के नए क्षितिज', 'विस्मयकारी यात्रा' हैं। उनका साहित्य आज भी प्रासंगिक है और पाठकों के मन में गहरी छाप छोड़ता है।
'अज्ञेय' जी ने कविता के रूप में मौलिकता को नया आयाम दिया। उनकी कविताओं में जीवन की जटिलताओं और व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं की सूक्ष्मता से विवेचना की जाती थी। उनका साहित्य न केवल गहरी बौद्धिकता का प्रतीक है, बल्कि इसमें एक नई संवेदनशीलता और आत्मबोध भी निहित है। 'अज्ञेय' ने छायावादी कविता को एक नए मोड़ पर रखा, जहाँ आत्मा की गहरी अनुभूतियाँ और अस्तित्ववादी चिंतन प्रमुख थे। उन्होंने निरंतर आधुनिकता और परिवर्तन के विचारों को समाज और साहित्य में समाहित किया।