प्रो० जी० सुन्दर रेड्डी हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित विद्वान, लेखक और आलोचक थे। उनका जन्म दक्षिण भारत में हुआ था, लेकिन उन्होंने हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने हिंदी साहित्य की समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए और कई शोधपूर्ण ग्रंथों की रचना की।
उनकी भाषा-शैली विद्वत्तापूर्ण, तार्किक और स्पष्ट थी। वे हिंदी आलोचना साहित्य में आधुनिक दृष्टिकोण को अपनाने वाले प्रमुख साहित्यकारों में से एक थे। उनकी प्रमुख रचनाएँ 'हिंदी साहित्य का विकास', 'आधुनिक हिंदी साहित्य की प्रवृत्तियाँ', 'काव्यशास्त्र और साहित्य' आदि हैं।
वे एक कुशल अध्यापक भी थे, जिन्होंने हिंदी साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर गहन शोध किया और छात्रों को साहित्य की समृद्धि और महत्त्व को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके शोधपरक ग्रंथ साहित्यिक शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य के आलोचना क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया और भारतीय संस्कृति, भाषा और साहित्य को समृद्ध करने में अपना अमूल्य योगदान दिया।