भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का जन्म 9 सितंबर 1850 को वाराणसी में हुआ था। उन्हें हिंदी नवजागरण का अग्रदूत कहा जाता है। उन्होंने हिंदी साहित्य को आधुनिक दिशा प्रदान की और सामाजिक जागरूकता पर जोर दिया। वे कवि, नाटककार, निबंधकार और संपादक थे। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति, सामाजिक सुधार और देशप्रेम को अभिव्यक्त किया।
उनकी साहित्यिक विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
राष्ट्रीयता – उनकी रचनाएँ देशभक्ति और सामाजिक चेतना से ओत-प्रोत थीं।
भाषा-शैली – सरल, प्रवाहमयी और प्रभावशाली भाषा का प्रयोग।
नाटक और गद्य साहित्य – हिंदी नाटक और गद्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान।
सामाजिक सुधार – उन्होंने नारी शिक्षा, स्वदेशी आंदोलन और समाज में फैली कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई।
पत्रकारिता – उन्होंने ‘हरिश्चंद्र मैगजीन’ और ‘कवि वचन सुधा’ पत्रिकाओं का संपादन किया।
लोकप्रिय रचनाएँ – 'अंधेर नगरी', 'भारत दुर्दशा', 'वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति', 'नीलदेवी', 'प्रेम जंजाल' आदि।
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने हिंदी भाषा को आधुनिकता की ओर अग्रसर किया और हिंदी गद्य को एक सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान की। वे समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अपने लेखन को एक हथियार के रूप में प्रयोग किया। उनका निधन 6 जनवरी 1885 को हुआ, लेकिन हिंदी साहित्य में उनका योगदान अमर है।