कथा मनु ने, नम धरणी भीष।
बना जीवन रहस्य, निरुपाय।
एक उल्लास-सा जलता भ्रांत।
शून्य में फिरता हूँ असहाय।
कौन हो तुम वसंत के दूत।
विरस पत्तझड़ में अति सुकुमार।
धन तिमिर में चपला की रेख।
तपन में शीतल मंद बयार।
प्रस्तुत पद्यांश के पाठ एवं कवि का नाम लिखिए।
रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
मनु किससे अपने जीवन के विषय में बता रहे हैं?
मनु अपने आपको क्यों असहाय महसूस करते हैं?
तिमिर और चपला शब्दों के अर्थ लिखिए।