'रोते-बिलखते' शब्द 'भाग चले' क्रिया के होने के ढंग या रीति को दर्शा रहा है, इसलिए इसे रीतिवाचक क्रियाविशेषण कहा जाता है। इस प्रकार के क्रियाविशेषण से क्रिया के किस प्रकार, किस तरीके से या किस हालत में की जा रही है, यह स्पष्ट होता है।
यहाँ 'रोते-बिलखते' शब्द से यह भाव आता है कि व्यक्ति दुख और व्यथा के कारण अत्यंत पीड़ा में था और इस मानसिक स्थिति में वह भागा। इस क्रियाविशेषण के प्रयोग से घटना की तीव्रता और भावनात्मक गहराई पाठक तक प्रभावी ढंग से पहुँचती है। ऐसे शब्द क्रिया के साथ जुड़कर घटना को अधिक जीवंत और सजीव बनाते हैं।
अतः रीतिवाचक क्रियाविशेषण भाषा को अधिक प्रभावशाली और भावपूर्ण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।