Question:

एक सरल लोलक के लिए, जिसका आवर्त-काल T है, गतिज ऊर्जा (K.E.) का समय (t) के साथ विचरण किसके द्वारा निरूपित किया जाता है? 
 

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SHM में, गतिज और स्थितिज ऊर्जा दोनों की आवृत्ति कण की आवृत्ति से दोगुनी होती है, और उनका आवर्त काल कण के आवर्त काल का आधा होता है। कुल ऊर्जा स्थिर रहती है।
Updated On: May 4, 2026
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The Correct Option is A

Solution and Explanation



Step 1: Understanding the Question:

प्रश्न में एक सरल लोलक की गतिज ऊर्जा (K.E.) और समय (t) के बीच संबंध को दर्शाने वाले सही ग्राफ को पहचानने के लिए कहा गया है। लोलक का आवर्त काल T है।


Step 2: Key Formula or Approach:

1. एक सरल लोलक (छोटे दोलनों के लिए) सरल आवर्त गति (SHM) करता है।
2. SHM में कण का वेग: \( v = A\omega \cos(\omega t + \phi) \) या \( v = -A\omega \sin(\omega t + \phi) \)।
3. गतिज ऊर्जा का सूत्र: \( K.E. = \frac{1}{2}mv^2 \)।
4. K.E. की आवृत्ति: गतिज ऊर्जा की आवृत्ति दोलन की आवृत्ति से दोगुनी होती है।


Step 3: Detailed Explanation:

चरण 1: गतिज ऊर्जा का समीकरण व्युत्पन्न करें
मान लीजिए कि लोलक का विस्थापन \( x = A \sin(\omega t) \) द्वारा दिया गया है (माध्य स्थिति से शुरू)।
वेग \( v = \frac{dx}{dt} = A\omega \cos(\omega t) \)।
गतिज ऊर्जा \( K.E. = \frac{1}{2}mv^2 = \frac{1}{2}m(A\omega \cos(\omega t))^2 = \frac{1}{2}mA^2\omega^2 \cos^2(\omega t) \)।
त्रिकोणमितीय सर्वसमिका \( \cos^2(\theta) = \frac{1 + \cos(2\theta)}{2} \) का उपयोग करते हुए:
\[ K.E. = \frac{1}{4}mA^2\omega^2 (1 + \cos(2\omega t)) \] चरण 2: गतिज ऊर्जा के विचरण के गुणों का विश्लेषण करें

गैर-ऋणात्मकता: चूंकि K.E. \(v^2\) या \( \cos^2(\omega t) \) के समानुपाती है, यह हमेशा गैर-ऋणात्मक (\(\geq 0\)) होती है। इसलिए, ग्राफ हमेशा समय-अक्ष के ऊपर या उस पर होना चाहिए। यह विकल्प (B) को खारिज करता है।
आवर्त काल: K.E. के समीकरण में \( \cos(2\omega t) \) पद है, जिसका अर्थ है कि K.E. की कोणीय आवृत्ति \(2\omega\) है।
लोलक की कोणीय आवृत्ति \( \omega = \frac{2\pi}{T} \) है।
K.E. की कोणीय आवृत्ति \( \omega_{KE} = 2\omega = \frac{4\pi}{T} \)।
K.E. का आवर्त काल \( T_{KE} = \frac{2\pi}{\omega_{KE}} = \frac{2\pi}{2\omega} = \frac{2\pi}{2(2\pi/T)} = \frac{T}{2} \)।
इसका मतलब है कि गतिज ऊर्जा लोलक के दोलन की तुलना में दोगुनी आवृत्ति से दोलन करती है, या इसका आवर्त काल लोलक के आवर्त काल का आधा होता है। चरण 3: विकल्पों का मूल्यांकन करें

ग्राफ (1): यह ग्राफ हमेशा धनात्मक होता है। यह t=0 पर अधिकतम से शुरू होता है, t=T/4 पर शून्य हो जाता है, और t=T/2 पर फिर से अधिकतम हो जाता है। यह एक पूर्ण चक्र को T/2 समय में पूरा करता है। यह हमारे विश्लेषण से मेल खाता है (यह \( \cos^2(\omega t) \) के ग्राफ जैसा दिखता है)।
ग्राफ (2): यह ऋणात्मक मान दिखाता है, जो K.E. के लिए संभव नहीं है।
ग्राफ (3): यह एक पूर्ण चक्र को T समय में पूरा करता है। इसका आवर्त काल T है, जो गलत है।
ग्राफ (4): यह भी एक पूर्ण चक्र को T समय में पूरा करता है (t=0 पर शून्य, t=T/2 पर शून्य)। इसका आवर्त काल T है, जो गलत है।

Step 4: Final Answer:

केवल ग्राफ (1) ही गतिज ऊर्जा के सही विचरण को दर्शाता है, जो हमेशा धनात्मक होता है और जिसका आवर्त काल T/2 होता है।
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