दो परिपथों (A) और (B) पर विचार करें, जिनमें से प्रत्येक में दो प्रतिरोध \(R_0\) के बने हैं जिनमें तापीय गुणांक \(\alpha\) है। एक प्रतिरोध का ताप गुणांक धनात्मक, \(+\alpha\) है, जबकि दूसरे का ताप गुणांक ऋणात्मक, \(-\alpha\) है। इन परिपथों में प्रवाहित धारा \(I_A\) और \(I_B\) दर्शायी गई है। प्रारंभिक तापमान पर, दोनों प्रतिरोधों का मान \(R_0\) है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ाया जाता है, इन परिपथों में धारा में परिवर्तन का वर्णन करने वाला सही विकल्प है :
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श्रृंखला संयोजन में विपरीत ताप गुणांक एक-दूसरे को संतुलित कर सकते हैं, लेकिन समान्तर संयोजन में कुल प्रतिरोध बदलता है।
पद 1: प्रश्न को समझना
हमें तापमान बढ़ाने पर दोनों परिपथों में कुल प्रतिरोध और धारा का व्यवहार देखना है।
पद 2: मुख्य सूत्र या दृष्टिकोण
प्रतिरोध का तापमान पर निर्भरता:
\[
R=R_0(1+\alpha \Delta T)
\]
और
\[
R=R_0(1-\alpha \Delta T)
\]
पद 3: विस्तृत व्याख्या
परिपथ (A) में दोनों प्रतिरोध श्रेणीक्रम में हैं:
\[
R_A=R_0(1+\alpha T)+R_0(1-\alpha T)
\]
\[
=2R_0
\]
अतः:
\[
I_A=\frac{V}{2R_0}
\]
स्थिर रहेगा।
परिपथ (B) में दोनों प्रतिरोध समान्तर क्रम में हैं:
\[
R_B=\frac{R_1R_2}{R_1+R_2}
\]
जहाँ,
\[
R_1=R_0(1+\alpha T), \quad R_2=R_0(1-\alpha T)
\]
अब:
\[
R_B=\frac{R_0^2(1-\alpha^2T^2)}{2R_0}
\]
\[
=\frac{R_0}{2}(1-\alpha^2T^2)
\]
यह तापमान बढ़ने पर घटता है।
अतः:
\[
I_B=\frac{V}{R_B}
\]
बढ़ेगा।
पद 4: अंतिम उत्तर
अतः \(I_A\) स्थिर रहेगा जबकि \(I_B\) बढ़ेगा। सही विकल्प (C) है।