दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
निन्दा कुछ लोगों की पूँजी होती है।बड़ा लम्बा-चौड़ा व्यापार फैलाते हैं वे इस पूँजी से। कई लोगों की प्रतिष्ठा ही दूसरों की कलंक-कथाओं के पारायण पर आधारित होती है।बड़े रस-विभोर होकर वे जिस-सतिस की सत्य-कलित कलंक-कथा सुनाते हैं और स्वयं को पूर्ण संत समझने-समझाने की बुद्धि का अनुभव करते हैं।
उपर्युक्त गद्यांश के लेखक और पाठ का नाम लिखिए।
रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
निन्दा किसकी पूँजी होती है?
'सत्य-कलित, कलंक-कथा' का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
कुछ लोगों की प्रतिष्ठा का आधार क्या होता है?