दिये गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:
जन का प्रवास अनंत होता है! महलों बच्चों से भूमि के साथ राष्ट्रीय जन ने तात्कालिक प्रयास किया। जब तक सूर्य की रश्मि निर्यात-प्रकाश रुपक का अनुपम से भर देती है तब तक सूर्य ही जन का जीवन भी अमर है! इतिहास के अनेक उत्तर-चयन कर करने के बाद भी राष्ट्र-निवासी जन ने उत्थान लहरें से आगे बढ़ने के लिए आज भी असर-अमर है! जन का संतमुखी जीवन नदी के प्रवाह की तरह, अपने कर्म और ज्ञान द्वारा उद्यान के उनके घाटों का निर्माण करता होता है!
उपर्युक्त गद्यांश का पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
राष्ट्र-निवासी जन ने किसके साथ तात्कालिक स्थायित्व किया?
प्रस्तुत गद्यांश लेखक का उद्धारण देकर क्या स्पष्ट करना चाहता है?
'संतुलन' और 'रश्मियां' का शब्दार्थ लिखिए।
संतुलन: सामंजस्य, जो किसी वस्तु के विभिन्न पहलुओं में समर्पण और संतुलन बनाए रखने की स्थिति को दर्शाता है।
रश्मियां: सूर्य की किरणें या प्रबाहक ऊर्जा जो जीवन में नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करती हैं।