दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
गद्यांश:
मैंने बहुतों को रूप से पाते देखा था, बहुतों को धन से और गुणों से भी बहुतों को पाते देखा था, पर मानवता के आंगन में समर्पणऔर शांति का यह अद्भुत सौंदर्य स्वरूप आज अपनी ही आँखों से देखा कि कोई अपनी पीड़ा से किसी को पाये और किसी का उत्तम संदर्भ किसी की पीड़ा के लिए ही सुनिश्चित रहे।
उपर्युक्त गद्यांश के पाठ एवं लेखक का नाम लिखिए।
रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
लेखक ने समर्पण और शांति का कौन-सा अद्भुत स्वरूप देखा?
उपर्युक्त गद्यांश में लेखक का क्या उद्देश्य निहित है?
प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने किस गद्य विधा का प्रयोग किया है?