"ध्रुवयात्रा" के प्रमुख पात्र ध्रुव का चरित्र प्रेरणा से भरपूर है। वह एक साधारण राजकुमार था, लेकिन अपनी मां से मिली अनदेखी और अपमान के बाद उसने अपने आत्मसम्मान के लिए संघर्ष करना शुरू किया। ध्रुव का चरित्र शक्ति, साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। वह भगवान विष्णु के प्रति अपनी श्रद्धा को पूरे हृदय से प्रकट करता है, और अपनी तपस्या से वह अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता है। उसकी यात्रा न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक और आत्मिक विकास की भी होती है। ध्रुव का विश्वास अपार है, और उसकी संघर्षशीलता उसे अपने लक्ष्य की ओर एक कदम और बढ़ाती है। ध्रुव का चरित्र हमें यह शिक्षा देता है कि किसी भी कठिनाई या विषम परिस्थिति में भी यदि हमारे पास दृढ़ नायकत्व, विश्वास और धैर्य हो, तो हम किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। वह समाज के लिए एक आदर्श और प्रेरणा बनकर उभरता है।