Question:

‘डायरी का एक पन्ना’ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि प्रतीकात्मक समारोह एवं घटनाएँ भी सच्ची भावनाओं को जन्म दे सकती हैं।

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पहले बताइए कि 26 जनवरी 1931 का आयोजन प्रतीकात्मक ही था, फिर लिखिए कि लोगों ने उसके लिए लाठियाँ और गिरफ्तारियाँ तक सहीं, जो सच्ची भावना का प्रमाण है।
Updated On: Sep 15, 2026
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Solution and Explanation

Concept:
  • ‘डायरी का एक पन्ना’ सीताराम सेकसरिया की डायरी का अंश है, जिसमें 26 जनवरी 1931 को कलकत्ता में मनाए गए स्वाधीनता दिवस का वर्णन है।
  • प्रतीकात्मक समारोह का अर्थ है ऐसा आयोजन जिससे तुरंत कोई भौतिक लाभ न हो, पर जो किसी भाव का प्रतीक हो।

Step 1: समारोह की प्रतीकात्मकता समझाइए।
उस दिन देश स्वतंत्र नहीं हुआ था। झंडा फहराना और स्वाधीनता की प्रतिज्ञा पढ़ना केवल एक प्रतीक था, कोई सत्ता परिवर्तन नहीं।

Step 2: फिर भी लोगों की भागीदारी देखिए।
इसके बावजूद मानो सारा शहर उमड़ पड़ा। मॉनुमेंट के नीचे हजारों लोग एकत्र हुए और लोगों ने पहले कभी इतनी बड़ी सभा नहीं देखी थी।
लोग स्वयं आए, किसी के कहने पर नहीं।

Step 3: भावना की सच्चाई के प्रमाण दीजिए।
पुलिस की लाठियाँ चलीं, फिर भी लोग पीछे नहीं हटे। स्त्रियों ने आगे बढ़कर जुलूस निकाला, गिरफ्तारियाँ दीं और मार खाई।
कोई नकली भावना इतना कष्ट सहन नहीं करा सकती।

Step 4: निष्कर्ष निकालिए।
इससे सिद्ध होता है कि प्रतीक भी सच्ची भावना जगा सकते हैं। झंडा केवल कपड़े का टुकड़ा है, पर वह जिस भाव का प्रतीक बन जाता है, उसके लिए लोग प्राण तक देने को तैयार हो जाते हैं।

Final Answer: 26 जनवरी 1931 का आयोजन केवल प्रतीकात्मक था, क्योंकि उस दिन देश स्वतंत्र नहीं हुआ था। फिर भी हजारों लोग स्वयं उमड़ पड़े, लाठियाँ खाईं, गिरफ्तारियाँ दीं और स्त्रियाँ तक आगे आईं। यह सिद्ध करता है कि प्रतीकात्मक समारोह भी सच्ची और गहरी भावनाओं को जन्म दे सकते हैं।
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