'चौर' उथले ताल होते हैं। ये ताल अधिक गहरे नहीं होते, बल्कि कुछ जगहों पर ये पानी से भरे हुए उथले स्थान होते हैं जो विशेष रूप से मानसून के समय में देखे जाते हैं। चौर आमतौर पर ऐसे निम्न भू-भागों में बनते हैं जहाँ वर्षा का जल एकत्र हो जाता है और धीरे-धीरे भरे हुए ताल या दलदली क्षेत्र का रूप ले लेता है।
मानसून के दौरान ये चौर जल से भर जाते हैं और कई बार आसपास के खेतों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जलस्रोत का कार्य भी करते हैं। चौरों में जल का ठहराव होने के कारण इन क्षेत्रों में विशेष प्रकार की वनस्पतियाँ, जलीय जीव और पक्षी भी पाए जाते हैं। इससे जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है और यह पारिस्थितिक तंत्र (ecosystem) के लिए भी महत्त्वपूर्ण होते हैं।
चौर न केवल पर्यावरणीय दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण होते हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन और आजीविका से भी जुड़े होते हैं। कई बार चौरों का उपयोग मछली पालन, पशुओं के लिए जल स्रोत, या सिंचाई के लिए किया जाता है। इसलिए इनका संरक्षण और संतुलन बनाए रखना आवश्यक होता है ताकि ये प्राकृतिक संसाधन बने रहें और समाज को निरंतर लाभ पहुँचा सकें।