'प्रधान' शब्द 'नाटककार' संज्ञा की विशेषता बताता है, जो किसी वस्तु या व्यक्ति के गुण या विशेषता को दर्शाने वाला शब्द होता है, इसलिए इसे गुणवाचक विशेषण कहा जाता है। गुणवाचक विशेषण किसी संज्ञा के गुण, रूप, रंग, गुणता या स्थिति को प्रकट करता है और उसे अन्य समान वस्तुओं से अलग करता है।
यहाँ 'प्रधान' शब्द नाटककार की महत्ता या उसके उच्चतम स्तर के गुण को दर्शाता है, जिससे पता चलता है कि वह नाटककार सामान्य नहीं बल्कि विशेष, श्रेष्ठ या महत्वपूर्ण है। साथ ही, यह विशेषण 'नाटककार' के लिंग और वचन के अनुसार है, अर्थात् यह पुल्लिंग और एकवचन रूप में प्रयोग हुआ है, जो व्याकरण के नियमों का पालन करता है।
इस प्रकार, 'प्रधान' शब्द गुणवाचक विशेषण के रूप में नाटककार की विशेषता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है और वाक्य को अर्थपूर्ण बनाता है।