'बहादुर' कहानी के लेखक रवींद्रनाथ टैगोर हैं। इस कहानी का प्रमुख पात्र बहादुर है, जो एक गरीब, मेहनती और ईमानदार व्यक्ति है। वह कोलकाता में एक जमींदार के यहाँ काम करता है और अपने गाँव के प्रति गहरा प्रेम रखता है।
सहनशीलता एवं संघर्ष: बहादुर गरीबी और कठिनाइयों के बावजूद ईमानदारी से काम करता है। वह अपनी सहनशीलता, निष्ठा और परिश्रम के लिए पहचाना जाता है।
सरलता एवं सादगी: बहादुर अत्यंत सरल, सादगीपूर्ण और भोला व्यक्ति है। उसकी दुनिया सीमित है, लेकिन उसमें वह संतोषपूर्वक जीता है।
देशप्रेम और कर्तव्यनिष्ठा: वह अपने गाँव और परिवार से अत्यधिक प्रेम करता है। शहर में रहते हुए भी वह हमेशा गाँव लौटने की इच्छा रखता है।
वेदना और करुणा: कहानी के अंत में उसकी भावनात्मक स्थिति दयनीय हो जाती है, जब वह गाँव लौटने की आशा में ठगा जाता है। उसकी त्रासदी पाठकों में करुणा और सहानुभूति उत्पन्न करती है।
बहादुर एक ऐसा पात्र है जो आधुनिक समाज की कठोरता और गरीबों के शोषण को प्रतिबिंबित करता है। वह भारतीय समाज की उस वर्ग की व्यथा को दर्शाता है जो बड़े शहरों में रोजगार की तलाश में संघर्ष करता है।