Question:

बच्चों की तुलना तितलियों की दुनिया से क्यों की गई है?

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बच्चे = तितलियाँ कारण: चंचलता + मासूमियत + रंगीन कल्पना + स्वतंत्रता
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Solution and Explanation

Concept: साहित्य में बच्चों की तुलना अक्सर प्रकृति की सुंदर और कोमल वस्तुओं से की जाती है। तितलियाँ सुंदरता, चंचलता, स्वतंत्रता और रंग-बिरंगी दुनिया का प्रतीक होती हैं। इसी कारण बच्चों की दुनिया को तितलियों की दुनिया के समान बताया गया है।
व्याख्या: बच्चों की तुलना तितलियों की दुनिया से निम्न कारणों से की गई है—
चंचलता: जैसे तितलियाँ एक फूल से दूसरे फूल पर मंडराती रहती हैं, वैसे ही बच्चे भी चंचल और फुदकने वाले होते हैं।
निर्मलता और मासूमियत: तितलियों की कोमलता बच्चों की निष्कपटता का प्रतीक है।
रंग-बिरंगी दुनिया: तितलियों की तरह बच्चों की कल्पनाएँ भी रंगों और सपनों से भरी होती हैं।
स्वतंत्रता: तितलियाँ खुले आकाश में स्वतंत्र उड़ती हैं, उसी प्रकार बच्चे भी बंधनों से मुक्त होकर जीना चाहते हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य: दोनों ही प्रकृति की सुंदरतम अभिव्यक्तियाँ मानी जाती हैं।
भावार्थ: लेखक बच्चों की दुनिया की सुंदरता, कोमलता और स्वतंत्रता को दर्शाने के लिए तितलियों का प्रतीक प्रयोग करता है। यह तुलना बच्चों के मन की निश्छलता और जीवन की रंगीनता को प्रभावी ढंग से व्यक्त करती है।
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