Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में दिए गए रेखांकित अंश की व्याख्या करने के लिए कहा गया है। यह अंश लाक्षणिक भाषा में लिखा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने महात्मा गाँधी के भारतीय समाज पर पड़े प्रभाव का अलंकारिक वर्णन किया है।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि हम भारतवासियों का यह सौभाग्य है कि हमने भारतीय संस्कृति के अमृत तत्त्व (सत्य और अहिंसा) को महात्मा गाँधी के रूप में साकार होते देखा है। गाँधीजी ने हमें हमारी अमर संस्कृति और उसकी शक्ति का स्मरण कराया।
- 'हमारी सूखी हड्डियों में नई मज्जा डाल': इसका आशय है कि परतंत्रता के कारण भारतवासी निराश, हताश और शक्तिहीन हो चुके थे, जैसे बिना मज्जा के हड्डियाँ निर्जीव होती हैं। गाँधीजी ने उनमें नई शक्ति और ऊर्जा का संचार किया।
- 'हमारे मृतप्राय शरीर में नये प्राण फूंके': इसका अर्थ है कि गुलामी के कारण भारत राष्ट्र और समाज एक मृत शरीर के समान चेतना-शून्य हो गया था। गाँधीजी ने अपने विचारों और आंदोलनों से उस मृतप्राय राष्ट्र में नए जीवन का संचार कर दिया।
- 'मुरझाये हुए दिलों को फिर खिला दिया': इसका तात्पर्य है कि निराशा और दुःख से लोगों के मन मुरझा गए थे। गाँधीजी ने उनमें आशा, उत्साह और स्वतंत्रता की उमंग भरकर उन्हें फिर से प्रफुल्लित कर दिया।
Step 3: Conclusion:
अतः, इस अंश में लेखक ने बताया है कि महात्मा गाँधी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर निराश और कमजोर भारतीय जनमानस को नई शक्ति, चेतना और आशा से भर दिया।