वाणिज्यिक बैंक आधुनिक अर्थव्यवस्था के केन्द्रीय वित्तीय मध्यस्थ हैं। जमा कार्य से वे बिखरी बचत को संचित करते हैं, भुगतान सुविधा देते हैं और धन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। खातों की प्रकृति के अनुसार निकासी अधिकार और ब्याज भिन्न रहते हैं। उधार/अग्रिम कार्य द्वारा बैंक उत्पादक उपक्रमों और उपभोक्ताओं को धन उपलब्ध कराते हैं—नकद ऋण, ओवरड्राफ्ट, नकदी साख, बिल‑डिस्काउंट, टर्म लोन और परियोजना वित्त इसके रूप हैं। इसी प्रक्रिया में बैंक क्रेडिट सृजन करते हैं जिससे निवेश और आय का विस्तार होता है। सहायक एजेन्सी कार्यों में चेक‑ड्राफ्ट क्लीयरिंग, NEFT/RTGS, ट्रस्ट/कर भुगतान, विदेशी मुद्रा सेवा, लॉकर सेवा, और परामर्श शामिल हैं। नियामकीय ढाँचा CRR, SLR और पूँजी पर्याप्तता जैसे मानकों से स्वास्थ बनाए रखता है।