मुद्रा को प्रायः धातु मुद्रा, वैध निविदा मुद्रा और विधेयाधर या विश्वास‑आधारित रूपों में समझाया जाता है। विधेयाधर मुद्रा का स्वीकार मुख्यतः विश्वास से होता है—कि जारीकर्ता संस्था समय पर इसे वैध मुद्रा में भुना देगी। बैंक जमाएँ और उनके विरुद्ध चेक, डेबिट कार्ड, ड्राफ्ट आदि दैनिक लेनदेन में व्यापक रूप से चलते हैं, पर इन्हें स्वीकार करना कानून से अनिवार्य नहीं; इन्हें जनता जारीकर्ता की साख के कारण अपनाती है। इसके विपरीत कानूनी निविदा (legal tender) जैसे केंद्रीय बैंक के नोटों को कोई व्यक्ति देनदारी चुकाने में अस्वीकार नहीं कर सकता। पाठ्यक्रम में कभी‑कभी fiat और fiduciary शब्द साथ आते हैं: fiat कानूनी आदेश से, fiduciary विश्वास से—प्रश्न में विधेयाधर को विश्वास‑आधारित अर्थ में समझें।