Question:

सियार ने भेड़िए के मुँह में घास के तिनके क्यों खोंसे? ऐसा करके वह क्या सिद्ध करना चाहता था?

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सियार ने भेड़िए के मुँह में घास के तिनके खोंसकर उसे संत का रूप दिया। वह यह सिद्ध करना चाहता था कि बाहरी दिखावे से कोई भी संत बन सकता है, चाहे अंदर से कैसा भी हो।
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Solution and Explanation

सियार ने भेड़िए के मुँह में घास के तिनके इसलिए खोंसे ताकि वह उसे एक संत या महात्मा का रूप दे सके। घास का तिनका मुँह में रखना संतों और साधुओं की एक पहचान मानी जाती है, जो उनकी अहिंसा और सादगी का प्रतीक होता है। ऐसा करके सियार यह सिद्ध करना चाहता था कि बाहरी रूप-रंग और दिखावे से कोई भी व्यक्ति संत बन सकता है। चाहे वह अंदर से कितना भी क्रूर, लालची या शोषक क्यों न हो, यदि वह बाहरी तौर पर साधु का वेश धारण कर ले तो लोग उसे संत समझने लगते हैं। सियार व्यंग्यात्मक ढंग से यह दिखाना चाहता था कि इस समाज में दिखावे और ढोंग का बोलबाला है। वास्तविक गुणों से अधिक महत्व बाहरी आडंबरों को दिया जाता है।
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