रेखांकित अंश की व्याख्या:
कवि रामनरेश त्रिपाठी जी कहते हैं कि देश-प्रेम एक पवित्र (पुण्य) भावना है।
यह एक ऐसा पवित्र क्षेत्र है जो निर्मल (अमल) और असीम त्याग से सुशोभित (विलसित) होता है। अर्थात्, देश-प्रेम की भावना व्यक्ति को त्याग और बलिदान की प्रेरणा देती है।
कवि आगे कहते हैं कि देश-प्रेम की भावना से ही आत्मा का विकास होता है।
जब व्यक्ति अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर देश के हित में सोचता है, तो उसकी आत्मा उन्नत होती है और इसी से सच्ची मानवता (मनुष्यता) का विकास होता है।