अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के अपने प्रयासों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र संघ कुछ मामलों में असफल भी रहा है। इसकी दो प्रमुख असफलताएँ निम्नलिखित हैं:
नरसंहारों को रोकने में विफलता: संयुक्त राष्ट्र 1994 में रवांडा में हुए तुत्सी समुदाय के नरसंहार और 1995 में बोस्निया के स्रेब्रेनिका में हुए नरसंहार को रोकने में बुरी तरह विफल रहा। इन दोनों ही मामलों में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना की मौजूदगी के बावजूद बड़े पैमाने पर हत्याएं हुईं, जिससे संगठन की क्षमता पर गंभीर सवाल उठे।
सुरक्षा परिषद् में वीटो का दुरुपयोग: सुरक्षा परिषद् के पांच स्थायी सदस्यों (P5) को प्राप्त वीटो शक्ति का उपयोग अक्सर उनके अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए किया जाता है, जिससे कई महत्वपूर्ण वैश्विक संकटों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। सीरिया, यूक्रेन और अन्य संघर्षों में वीटो के कारण परिषद् में गतिरोध उत्पन्न हुआ और संयुक्त राष्ट्र कोई ठोस कदम उठाने में असमर्थ रहा।