प्रकृति की रक्षा : अपनी सुरक्षा
संकेत-बिंदु: • प्रकृति और मनुष्य का संबंध • प्रकृति के साथ खिलवाड़ के उदाहरण • प्रकृति की रक्षा के उपाय
प्रकृति की रक्षा : अपनी सुरक्षा
प्रकृति और मनुष्य का संबंध अटूट है। मनुष्य के जीवन का आधार प्रकृति ही है; हमें भोजन, जल, वायु सबकुछ प्रकृति से ही मिलता है। प्रकृति माँ के समान हमारा पालन-पोषण करती है, परंतु मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए उसी माँ का विनाश कर रहा है। औद्योगिकीकरण और विकास की अंधी दौड़ में हम प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। वनो की अंधाधुंध कटाई, नदियों का प्रदूषण, और वायुमंडल में जहरीली गैसों का उत्सर्जन इसके ज्वलंत उदाहरण हैं। इस खिलवाड़ का दुष्परिणाम हमें बाढ़, सूखा, जलवायु परिवर्तन और नई-नई बीमारियों के रूप में भुगतना पड़ रहा है। यदि हम अपनी सुरक्षा चाहते हैं, तो हमें प्रकृति की रक्षा करनी ही होगी। इसके लिए हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए, जल स्रोतों को स्वच्छ रखना चाहिए और प्रदूषण फैलाने वाले साधनों का उपयोग कम करना चाहिए।
प्रकृति को बचाकर ही हम अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं।
Step 1: Understanding the Question:हम कटाओ के करीब आए और बर्फ़ से ढके पहाड़ दिखने लगे। (सरल वाक्य में बदलिए)
भारतीय सैनिक संकट के बादलों के समक्ष निराश नहीं हुए। (संयुक्त वाक्य में बदलिए)
बिस्मिल्ला खाँ काशी में होने वाले परिवर्तनों को देखकर दुखी थे। (मिश्र वाक्य में बदलिए)
यह वही मंच है जहाँ कल सम्मान समारोह हुआ। (आश्रित उपवाक्य और उसका भेद भी लिखिए)
बोलचाल की भाषा में जो आसानी रहती है वही लिखित भाषा में भी होनी चाहिए। (रचना के आधार पर वाक्य का भेद लिखिए)
| Case No. | Lens | Focal Length | Object Distance |
|---|---|---|---|
| 1 | \(A\) | 50 cm | 25 cm |
| 2 | B | 20 cm | 60 cm |
| 3 | C | 15 cm | 30 cm |