प्रिय मित्र [मित्र का नाम],
सप्रेम नमस्ते।
आशा है तुम सकुशल होगे। कल हमारे परिवार ने शहर में लगे वार्षिक मेले का आनंद लिया। तुम्हें भी उसकी झलक दिखाने के लिए यह पत्र लिख रहा हूँ।
मेला देखते ही बनता था। चारों ओर रंग-बिरंगी रोशनियाँ, झूले, खाने-पीने की दुकानें और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी लगी थी। सबसे पहले हमने झूलों का आनंद लिया। चाइना व्हील और पेंडुलम राइड ने तो रोमांचित कर दिया। छोटे भाई-बहनों के लिए नन्हें झूले भी थे जहाँ वे खूब खेले।
प्रदर्शनी में विभिन्न राज्यों की हस्तकला की वस्तुएँ प्रदर्शित थीं। कश्मीरी शॉल, राजस्थानी जूतियाँ, मधुबनी पेंटिंग और आभूषण देखते ही बनते थे। मुझे हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुओं ने विशेष रूप से आकर्षित किया। मैंने अपने कमरे के लिए एक सुंदर सी दीवार घड़ी और माँ के लिए राजस्थानी जूतियाँ खरीदीं।
खाने-पीने का तो कहना ही क्या! गोलगप्पे, पावभाजी, दाल कचौरी, कुल्फी और मलाईदार जलेबियों ने मन मोह लिया। पापा ने सबको हाथों से बनी बाँस की चीज़ें भी दिलवाईं।
शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। लोक नृत्य और संगीत ने समा बाँध दिया। रात लौटते समय लगा कि और भी बहुत कुछ देखना बाकी रह गया। तुम भी अगले साल जरूर आना, साथ में खूब मजा करेंगे।
अपने घर में सबको मेरा प्रणाम कहना।
तुम्हारा मित्र,
[आपका नाम]
पता: [आपका पता]