निम्नलिखित पंक्तियों की सर्वांगीण व्याख्या कीजिए:
पंक्तियाँ: दृष्टि है समीर-सागर पर
आंसू सच्चे मूरत की छाया
जिन के बच्ये हृदय पर
निंद्य विखंड की समाहित माया
यह तेरी रन्त-
भीति आकाशों से,
धन धीनी-जननी से सजन गुज़ गुज़ अंखोर
उसमे पुचकी, आशाओं से
नवजीवन की, ऊँचाई का निर,
ताक रहते हैं, ऐ विप्लव के बाल!
दिए गए संस्कृत पद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए : रात्रिर्गमिष्यति भविष्यति सुप्रभातं भास्वानुदेश्यति हसिष्यति पंकजालिः । इत्थं विचिन्तयति कोशगते द्विरेफे हा हन्त ! हन्त ! नालिनीं गज उज्जहार ।।
चढ़ चेतक पर तलवार उठा,
रखता था भूतल पानी को ।
राणा प्रताप सिर काट-काट,
करता था सफल जवानी को ।।
सेना-नायक राणा के भी
रण देख देखकर चाह भरे ।
मेवाड़ सिपाही लड़ते थे
दूने तिगुने उत्साह भरे ।।
निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित दिए गए तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए:रानी मैं जानी अजानी महा, पबि-पाहन हूँ ते कठोर हियो है ।
राजहुँ काजु अकाजु न जान्यो, कह्यो तियको जेहिं कान कियो है ।।
ऐसी मनोहर मूरति ए, बिछुरे कैसे प्रीतम लोगु जियो है ।
आँखिन में सखि राखिबो जोगु, इन्हें किमि कै वनवास दियो है ।।
सार्थः प्रवसतो मित्रं भार्या मित्रं गृहे सतः । आतुरस्य भिषक् मित्रं दानं मित्रं मरिष्यतः ।।
दिए गए संस्कृत पद्यांश में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए : बन्धनं मरणं वापि जयो वापि पराजयः । उभयत्र समो वीरः वीर भावो हि वीरता ।।