निम्नलिखित पंक्तियों की सर्वांगीण व्याख्या कीजिए:
पंक्तियाँ: दृष्टि है समीर-सागर पर
आंसू सच्चे मूरत की छाया
जिन के बच्ये हृदय पर
निंद्य विखंड की समाहित माया
यह तेरी रन्त-
भीति आकाशों से,
धन धीनी-जननी से सजन गुज़ गुज़ अंखोर
उसमे पुचकी, आशाओं से
नवजीवन की, ऊँचाई का निर,
ताक रहते हैं, ऐ विप्लव के बाल!
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