नीतिशास्त्र की परिभाषा दें।
Step 1: विषय-क्षेत्र.
नीतिशास्त्र मानव आचरण के मूल्य-विवेक का दर्शन है—सदाचार के सिद्धान्त, नैतिक तर्क और निर्णय-प्रक्रिया का अध्ययन।
Step 2: प्रमुख शाखाएँ.
(क) मानक नीतिशास्त्र—कर्तव्यवाद (देओन्टोलॉजी), फलवाद (उपादेयवाद), सद्गुण-नीति; (ख) मेटाएथिक्स—'भला' का अर्थ, नैतिक कथनों का सत्य-मूल्य; (ग) अनुप्रयुक्त—व्यावसायिक, जैव-चिकित्सीय, पर्यावरणीय आदि।
Step 3: भारतीय आयाम.
धर्म, यम–नियम, करुणा, अहिंसा और पुरुषार्थ-संतुलन नैतिक निर्णयों को दिशा देते हैं; गीता का निष्काम कर्म और समत्व व्यवहार-नीति का व्यावहारिक सूत्र है।
Step 4: उद्देश्य.
व्यक्ति–समाज कल्याण, न्याय, मानवीय गरिमा तथा दीर्घकालिक भलाई सुनिश्चित करना—इसी हेतु नीतिशास्त्र नियम, सद्गुण और प्रयोजन—तीनों का संतुलन साधता है।
योग दर्शन में 'चित्तवृत्ति निरोध' को क्या कहते हैं?
भारतीय दर्शन की उत्पत्ति किससे मानी जाती है?
अद्वैत वेदान्त के अनुसार 'जगत' की सत्ता क्या है?
चार्वाक, बौद्ध और जैन किस दार्शनिक सम्प्रदाय में आते हैं?
स्याद्वाद को समझाने के लिए जैन दर्शन में कितने 'नयों/भंगियों' का प्रतिपादन किया गया?
ईश्वर की सत्ता के लिए 'नैतिक युक्ति' (Moral Argument) का समर्थन किसने किया है?
निम्न में से कौन पुरुषार्थ नहीं है?
'ऋण' की अवधारणा सम्बन्धित है—
निम्नलिखित में से कौन पुरुषार्थ के अन्तर्गत नहीं आता है ?
'एन इंट्रोडक्शन टू एथिक्स' के लेखक कौन हैं ?