मुद्रा के कार्यों को कई विद्वानों ने वर्गीकृत किया है, पर पॉल एंजिग (Paul Einzig) ने उन्हें स्थैतिक और गतिशील दो श्रेणियों में बाँटा। स्थैतिक कार्य वे हैं जो रोज़मर्रा के लेन–देन में स्थिर भूमिका निभाते हैं—जैसे विनिमय माध्यम, मूल्य मापक, भुगतान की इकाई और मूल्य संचय। इसके विपरीत गतिशील कार्य अर्थव्यवस्था की गति और विकास को प्रभावित करते हैं—जैसे ऋण-सृजन, निवेश प्रवाह, आय–उत्पादन पर प्रभाव, तथा व्यापार–चक्रों में मुद्रा की भूमिका। रैगनर फ़्रिश का प्रमुख योगदान इकोनोमेट्रिक्स/डायनामिक्स में, मार्शल का मूल्य-सिद्धांत में और हॉट्रे का मौद्रिक व्यापार–चक्रों में रहा; इसलिए स्थैतिक–गतिशील विभाजन का श्रेय एंजिग को दिया जाता है।