केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में कुल तरलता और क्रेडिट स्थितियों को साधनों के संयोजन से संचालित करता है। अल्पावधि नीति दरें (रेपो, रिवर्स‑रेपो) बैंकों की धन‑लागत बदलती हैं; CRR/SLR से जमा‑सृजन क्षमता पर सीधा असर पड़ता है; खुले बाजार परिचालन सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद‑बिक्री द्वारा प्रणाली की नकदी को जोड़ते‑घटाते हैं। विनियामक उपाय, दर‑मार्गदर्शन और अपेक्षा प्रबंधन से प्रसारण तंत्र सुदृढ़ होता है। मुद्रास्फीति बढ़ने पर नीति सख्त की जाती है, जिससे मांग‑दबाव कम होते हैं; मंदी में ढील दी जाती है ताकि ऋण सस्ता होकर निवेश‑खपत बढ़े। वित्तीय स्थिरता हेतु मैक्रो‑प्रुडेंशियल मानदंड भी मौद्रिक नीति के साथ चलते हैं। यह नीति राजकोषीय नीति के साथ तालमेल में सर्वोत्तम प्रभाव देती है।