'कवि प्रेमचंद नगर बाजार और अर्थव्यवस्था पर क्या टिप्पणी करते हैं? लिखें।'
प्रेमचंद नगर बाजार और अर्थव्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं कि वहाँ व्यापार में ईमानदारी का अभाव है। स्वार्थ और लालच के कारण लोग एक-दूसरे को धोखा देते हैं। इस प्रकार की व्यवस्था समाज में अन्याय और असमानता को जन्म देती है।
Final Answer:
प्रेमचंद के अनुसार नगर बाजार की अर्थव्यवस्था स्वार्थ और छल पर आधारित है।
संगतकार' कविता के संदर्भ में लिखिए कि संगतकार जैसे व्यक्तियों के व्यक्तित्व से युवाओं को क्या प्रेरणा मिलती है। किन्हीं दो का वर्णन कीजिए।
'मैं क्यों लिखता हूँ?' पाठ के आधार पर प्रत्यक्ष अनुभव और अनुभूति को स्पष्ट करते हुए लेखक पर पड़ने वाले इनके प्रभाव को लिखिए। आप दोनों में से किसे महत्त्व देते हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
'साना-साना हाथ जोड़ि...' पाठ में प्रकृति की विराटता का दर्शन है।' - पाठ के दृश्यों के आधार पर इसे स्पष्ट करते हुए लिखिए।
'माता का अँचल' पाठ से बच्चों के किन्हीं दो खेलों और उनके परिवेश का अंतःसंबंध स्पष्ट करते हुए टिप्पणी लिखिए।
फागुन की मनोहारिता मनुष्य के मन पर क्या प्रभाव डालती है? 'अट नहीं रही है' कविता के आधार पर लिखिए।