Question:

‘जाड़े की शाम थी। आज रोज़ की तुलना में कोहरा अधिक ही घना था। मैं अपनी नृत्य-कक्षा से लौट रहा था।’ …… – पंक्ति को आधार बनाकर लगभग 100 शब्दों में एक लघुकथा लिखिए।

Show Hint

दी गई पंक्ति से ही शुरुआत कीजिए, एक ही घटना लीजिए, बीच में पात्र का द्वंद्व दिखाइए और अंत में कोई संदेश देने वाली पंक्ति रखिए। शीर्षक देना न भूलिए।
Updated On: Sep 15, 2026
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Solution and Explanation

Concept:
  • लघुकथा बहुत छोटी कहानी होती है, जिसमें एक ही घटना, कम पात्र और अंत में कोई मोड़ या संदेश होता है।
  • दी गई पंक्ति से ही कथा आरंभ करनी है, उसे बदलना नहीं है।

Step 1: दी गई पंक्ति से वातावरण पकड़िए।
पंक्ति में जाड़े की शाम, घना कोहरा और अकेले लौटता हुआ पात्र है। यह वातावरण किसी अप्रत्याशित घटना के लिए तैयार करता है।

Step 2: एक ही घटना चुनिए।
लघुकथा में कई घटनाएँ नहीं डालनी चाहिए। एक ही घटना लीजिए, जैसे रास्ते में किसी असहाय व्यक्ति का मिलना।

Step 3: अंत में मोड़ या संदेश रखिए।
लघुकथा की शक्ति उसके अंत में होती है। अंत ऐसा हो कि पाठक कुछ सोचने लगे।

Step 4: शब्द-सीमा और शीर्षक का ध्यान रखिए।
लगभग 100 शब्द में कथा समेटिए और ऊपर एक उपयुक्त शीर्षक अवश्य दीजिए।

Final Answer:
शीर्षक : कोहरे में उजाला

जाड़े की शाम थी। आज रोज़ की तुलना में कोहरा अधिक ही घना था। मैं अपनी नृत्य-कक्षा से लौट रहा था। सड़क लगभग सूनी थी और हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था। तभी किनारे बैठी एक बुढ़िया दिखाई दी, जो ठंड से काँप रही थी। मेरे पैर ठिठक गए। मन ने कहा, देर हो रही है, आगे बढ़ो। पर दूसरी आवाज ने रोक लिया। मैंने अपना शॉल उतारकर उसे ओढ़ा दिया और पास की चाय की दुकान से एक गिलास गरम चाय दिलवाई। उसने काँपते हाथों से चाय थामी और मेरे सिर पर हाथ रख दिया। उस क्षण मुझे लगा, कोहरा तो अब भी वैसा ही था, पर भीतर कहीं उजाला हो गया था।
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