रेखांकित अंश की व्याख्या:
लेखक रामधारी सिंह 'दिनकर' जी ईर्ष्या से बचने का उपाय बताते हुए कहते हैं कि ईर्ष्यालु व्यक्ति को आत्म-निरीक्षण करना चाहिए।
उसे यह समझने का प्रयास करना चाहिए कि उसके मन में ईर्ष्या का भाव किस कमी (अभाव) के कारण उत्पन्न हो रहा है। वह दूसरों की किस वस्तु, गुण या सफलता को देखकर जलता है, जो उसके पास नहीं है।
जब उसे अपनी उस कमी का ज्ञान हो जाए, तो उसे उस अभाव को पूरा करने के लिए सकारात्मक (रचनात्मक) ढंग से प्रयास करना चाहिए। उसे विध्वंसक ईर्ष्या को छोड़कर सृजनात्मक कार्य में लगना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि कोई पड़ोसी की कार देखकर ईर्ष्या करता है, तो उसे मेहनत करके स्वयं कार खरीदने का प्रयास करना चाहिए, न कि पड़ोसी की कार को नुकसान पहुँचाने के बारे में सोचना चाहिए।